कथानक

हुस्न की डर्टी अदा


शुभ किरण

एक जमाना था जब गजल लिखी जाती थी..और दुपट्टे में तेरा, वो मुंह छिपाना याद है। रुख से जरा नकाब क्या हटा, वल्लाह कयामत ही आ गई। और अब..। मत पूछिए! हुस्न ने नकाब तो न जाने कब से उतार दिया, शेर-ओ- शायरी से लेकर अदाएं भी डर्टी हो गईं।

वह आती है। धड़ल्ले से अपनी फोटो अलबम टेबल पर रखती है और मुस्कराते हुए कहती है..मुझे किसी भी पोज से कोई ऐतराज नहीं। इससे पहले कि फिल्म का निर्माता या निर्देशक उसे तौलता, उसने खुद ही साफ कर दिया कि वह अपने प्रोफेशन में कितनी प्रोफेशनल है। निगाहें टिकती हैं तो निर्माता की बांछें खिल जाती हैं। वाओ! व्हाट ए पोज। बिकनी शॉट में तुम्हारा कांफिडेंस पूरी तरह झलक रहा है। मगर, क्या तुम..? सिर हां में हिल जाता है खुद ब खुद। कुछ न्यूड पिक्चर भी सामने रख दी जाती हैं। और..डील  फाइनल।

दोनों ही एक-दूसरे की नजरों में देखते हैं..शायद यह तय हो जाता है कि जिस्म और जलवों की नुमाइश को कैसे प्रासंगिक बनाना है। कैसे आम पब्लिक के सामने यह जताना है कि जो भी हम दिखा रहे हैं या बना रहे हैं या कर रहे हैं, सब इसी समाज के काले हिस्से का कड़वा सच है। बिंदासियत और आई ऐम हैप्पी, व्हाट आई ऐम। आई डोंट केयर इफ पीपल सी माई सो काल्ड डर्टी इमेजिस,  के रटे रटाए डॉयलॉग में सब कुछ छुप जाता है। अश्लीलता भी, फूहड़ता भी। यही तो हो रहा है हर तरफ। सफलता के साथ डेयरिंग होने का खिताब भी आसानी से हासिल हो जाता है। सनी लियोन से लेकर पूनम पांडेय तक..इस कतार में खड़ी हैं पूरे आत्मविश्वास के साथ। 

विद्या बालन एक सशक्त अभिनेत्री हैं। वह किरदार निभाती भर नहीं, उसे जीती हैं, उसमें डूबती हैं। इसीलिए फिल्म डर्टी पिक्चर में आइटम गर्ल सिल्क का किरदार जीते हुए वह पर्दे पर और पर्दे के पीछे होने वाली इसी डर्टी हकीकत को उजागर करने में काफी हद तक सफल रही, मगर पूरी तरह शायद नहीं। इसीलिए फिल्म देखने के बाद सवाल तो उठा, मगर गंभीरता नहीं झलकी। डर्टी अदाएं, मादकता और मांसलता का कांबो पैक बनने वाली सिल्क की बिंदासियत और स्याह अंधेरों के बीच कई सवाल अनुत्तरित ही रह गए। हमें सिल्क से सहानुभूति भी होती है, ईर्ष्या भी और कभी..शायद कुछ भी नहीं होता। वह वाकई एक मनोरंजन बनकर रह जाती है और बेधड़की से कहे गए उसके असंस्कारित संवाद बस यूं ही जेहन में कुछ देर तक गूंजते रहते हैं।

 पता नहीं क्यों, हम उस अंत को नहीं समझ पाते जो सिल्क को मिला। पर, हम सनी लियोन और उस जैसी कई पोर्न फिल्मों की हॉट स्टार बन चुकी लड़कियों की सिर्फ इसलिए खुली तारीफ कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने देह और शर्म की सारी देहरी तोड़ दी। सिर्फ एक प्रोफेशन के नाम पर। उस पर तर्क यह कि उन्होंने यह सब अपनी मर्जी से किया, पूरे होश में। महेश भट्ट ने तो सनी के साथ जिस्म 2 नामक फिल्म बनाने की घोषणा भी कर दी बिग बॉस के घर में। सुना है कि सलमान खान भी फिदा हैं।

बीते दिनों एक बार फिर एक लेस्बियन फोटोशूट ने हंगामा मचा दिया। यास्मीन खान और रिंपा तिवारी ने समलैंगिक संबंध, अधिकार व कानून के समर्थन में सिर्फ न्यूड पोज ही नहीं दिए, सेंसुअलिटी के नाम पर क्या-क्या नहीं कर दिया कैमरे के सामने। इसीलिए दोनों इन दिनों चर्चित हैं। नेट पर खूब खंगाली जा रही हैं इनकी तस्वीरें। इनकी फोटोग्राफी करने वाले शान कहते हैं कि जो बलखाती कमर और दैहिक आकर्षण रिंपा और यास्मीन में है, वह सनी लिओन, मल्लिका शेरावत और वीना मलिक में भी नहीं। ऐसे दावे और ऐसी तस्वीरें जो बस देह के इर्द- गिर्द घूमती हैं, ऐसी फिल्में जिनमें देह ही प्रमुख किरदार होता है, उनकी सफलता की गारंटी आसान क्यों हो जाती है? क्या महज उन लड़कियों की बिंदास अदा या कुछ और।

खैर, तस्वीरें तो पूनम पांडेय की भी खूब खंगाली गई थीं जब इन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम के वर्ल्ड कप जीतने पर उनके स्वागत और मनोरंजन के लिए खुद को बंद से खुलेआम कर देने का ऐलान कर दिया था। वह तो बवाल ऐसा मचा परंपरावादियों का कि उन्हें फैसला वापस लेना पड़ा। ऐसा ही बवाल मचा था अभिनेत्री नीतू चंद्रा और एक अन्य मॉडल के बीच हुए लेस्बियन शॉट की खातिर। पर, तब और अब में जो फर्क आया है, उसमें पोर्न स्टार सनी लियोन का काफी हाथ है।

 उनकी बेधड़की, उनकी बेबाकी और पोर्न फिल्मों को लेकर उनका प्रोफेशनल रवैया भारतीय मानस को भी मजबूर कर रहा है..पश्चिमी खुलेपन की हवा में सोचने के लिए। वैसे, इसमें कोई गुरेज होना भी नहीं चाहिए। देह के दायरे से परे सोचने में दिमाग का खुलापन विस्तार पाता है, पर क्या..वाकई यह दिमाग को विस्तार देगा? 

ऐसे कई पहलुओं के बीच आप भी रूबरू होइए सनी लियोन और सहारा नाइट की जिंदगी के उन पहलुओं से जो इन्हें देसी संस्कारों से विदेशी धरती पर पोर्न स्टार बना बैठीं। जानिए इस प्रोफेशन के पीछे की बातें।

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