चटोरी गलीजायके का माइलस्टोनकिरणअक्सर हैदराबादी भोजन में शाकाहार की बात नहीं होती। पर, 32 माइलस्टोन में शाकाहार की इतनी वेरायटी देखकर हैरानी हुई। चखकर मजा आ गया, कहना पड़ा। सूफीयाना खाना पसंद करने वालों के लिए यहां मिला-पनीर टमाटर कुथ, बागरा बैंगन, दही के कोफते और..। बहुत कुछ। कुछ लोग जीने के लिए खाते हैं, कुछ लोग खाने के लिए जीते हैं। बेशक, यह पुरानी कहावत एक खास संदर्भ में कही गई होगी जिसमें खाने के लिए जीने वाले जीने के लिए खाने वालों से कमतर आंके गए होंगे, लेकिन आज इस बात को हम नए अर्थो में परिभाषित करना चाहते हैं। जो लोग खाने के लिए जीते हैं, उन्होंने ही स्वाद और जायके को हमेशा नए अंदाज के साथ जिंदा रखा ताकि हमारी चटोरी जीभ एकरस स्वाद से परेशान न हो। और..जो लोग बढ़िया खिलाने के लिए जीते हैं, उनकी तो बात ही क्या। कहां से सोचते हैं रोज नई-नई रेसिपी, कहां से लाते हैं इतना लाजवाब जायका। मेरी तरह शायद आप भी यही सोचते होंगे कि शहंशाहों के दरबार में क्यों खानसामा खास होता था और क्यों हर नवाब या शहंशाह ने इसे खास बनाने पर जोर दिया। उत्तर प्रदेश का अवधी भोजन या यूं कहें मुगलई अंदाज, दक्षिण का दक्षिण भारतीय स्वाद और हैदराबाद का हैदराबादी स्टाइल। भले ही आज स्वाद के मुख्तलिफ अंदाज को पहचान देने वाले वे नवाब नहीं रहे, मगर आज भी कुछ जगहें ऐसी हैं जहां जाने पर वही खास अंदाज और वही खास स्वाद मिल जाएगा। जैसे, दिल्ली से सटे गुड़गांव (हरियाणा) में जयपुर-दिल्ली हाईवे पर स्थित 32 माइलस्टोन होटल और इसका रेस्तरां इंडिया हाउस का खालिस हैदराबादी टेस्ट। दावत-ए-निजाम में आपका भी स्वागत है। शहर के कोलाहल से दूर, मगर शहर के महत्वपूर्ण फूड प्वाइंट 32 माइलस्टोन को जयपुर हाईवे पर जाते समय बड़ी आसानी से देखा जा सकता है। बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा नाम और कई एकड़ में फैला इसका विस्तार सिर्फ गुड़गांव के लोगों को ही नहीं, जयपुर या दिल्ली अप डाउन करने वालों को भी खूब लुभाता है। कारण..खूबसूरत लैंडस्केप, अदब से भरा स्वागत, जेब को रास आने वाला बजट और रेस्तरां और होटल की मनमोहक आंतरिक सजावट देखकर सिर्फ नजरें ही नहीं खिलतीं, मन भी खुश होता है और जब मन को खुश करने वाला जायका भी हो तो क्या बात है। 32 माइलस्टोन के वाइस प्रेसिडेंट समीर मल्होत्रा की मानें तो हाईवे पर होने के कारण यह जहां आने जाने वाले यात्रियों को दो घड़ी बैठकर सुस्ताने और मन तृप्त कर देने वाले भोजन के कारण लुभाता है, वहीं मल्टीनेशनल कंपनी के कर्मचारियों को हाइजीनिक फैक्टर के कारण रास आता है। कॉरपोरेट कांफ्रेंस और पार्टी में भी 32 माइलस्टोन को इसलिए पसंद किया जाता है क्योंकि यहां क्वालिटी से कोई समझौता नहीं होता। जायके की भी वेरायटी बेशुमार है। इंडिया हाउस में इंडियन टेस्ट का पक्का वादा है तो वहीं मामा मिया, टोराजो, कैफे रोडहाउस और कार्ट अवे में कांटिनेंटल, चाइनीज जैसे इंटरनेशनल फूड फलेवर मिलता है हर बार। अक्सर हैदराबादी भोजन में शाकाहार की बात नहीं होती। पर, 32 माइलस्टोन में शाकाहार की इतनी वेरायटी देखकर हैरानी हुई, चखकर मजा आ गया, कहना पड़ा। सूफीयाना खाना पसंद करने वालों के लिए यहां मिला-पनीर टमाटर कुथ, बागरा बैंगन, दही के कोफते और वेजिटेबल कोरमा की वेरायटी तो वहीं दाल में खट्टी दाल, कद्दू का दालचा भी लोगों को खूब पसंद आ रहा था। कुछ लोग तो बस हैदराबादी बिरयानी ही खाना चाहते थे। रूमाली रोटी, नान, उल्टा तवा पराठा, लच्छा पराठे के साथ कोरमा विशेष रूप से पसंद आने वाला था। कुल मिलाकर, हैदराबाद के निजाम से निकला जायका 32 माइलस्टोन के रेस्तरां इंडिया हाउस में दावत-ए-निजाम बनकर आम लोगों को खालिस हैदराबादी स्वाद से परिचित करा गया। अब बताएं कि आप कब 32 माइलस्टोन जाकर अपने भीतर खाने के लिए जीने वाले स्वाद प्रेमी को तृप्त करेंगे। |




















